NCERT Solutions for Class 10 Science Chapter 7 Pdf

प्रिय विद्यार्थियों और सम्मानित साथियों ,
आज के इस लेख में हम कक्षा 10 के विज्ञान विषय की अध्ययन सामग्री के बारें में चर्चा करेंगें। जिसमें एन.सी.ई.आर.टी. के पाठ्यक्रम के अनुसार चर्चा करेंगें।

एन.सी.ई.आर.टी. के पाठ्यक्रम का केन्द्रिय बोर्ड के साथ – साथ विभिन्न राज्य बोर्ड भी अनुपालन करते है। जैसे – राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड। इसमें विद्यार्थियों को करके सीखने पर बल दिया जाता है। बच्चों की प्रकृति जिज्ञासु बनायी जाती है, ताकि उनकी रूचि विषय में पैदा हो सके।

हमारी टीम के द्वारा अध्याय का हल हिन्दी तथा अंग्रेंजी दोनो भाषाओं में उपलब्ध करवाया गया है। जिससे आपको अलग – अलग इसके लिए प्रयत्न नहीं करने पड़े। इसी के साथ पाठ्यपुस्तक के अध्याय भी आपको उपलब्ध करवाए जा रहे है, ताकि आपको पुस्तक की आवश्यकता होने पर इधर – उधर प्रयास नहीं करना हो।

इस लेख में हम अध्याय 7 के बारें में चर्चा करेंगें। अध्याय का नाम नियंत्रण एवं समन्वय (Control and Coordination) रहेगा। अध्याय 7 में मुख्य रूप से जीवों के या फिर हमारें शरीर के नियंत्रण के बारें में चर्चा करेंगें। जब सूर्य का प्रकाश होता है, तब पादप अपना भोजन बना पाते है। इसी प्रकार से बकरी या भैंस जब बैठी होती है। तब वह जुगाली करती है। जिससे भोजन का पाचन आसानी से हो सके। ठीक ऐसे ही जब आपका हाथ किसी गर्म सतह को छू जाता है, त बवह स्वतः ही अलग हो जाता है।

कभी आपने इन सभी क्रियाओं के बारें में सोचा है। नहीं भी सोचा तो यह क्रियाएं बड़ी ही सावधानी से नियंत्रित होती है। शरीर अपने आप ही अनुक्रिया के अनुरूप गति संपन्न करता है।

इन सभी क्रियाओं के अनुसार गति बहुकोशिकीय जीवों में विशिष्ट रूप से नियंत्रित होती है।

जंतुओं में नियंत्रण तथा समन्वय :-

जंतुओं में यह कार्य तंत्रिका तथा पेशी ऊत्तक के द्वारा किया जाता है।

ग्राही :-

तंत्रिका कोशिकाओं के ऐसे विशिष्ट सिरे या भाग जो कि बाहरी वातावरण से सूचनाओं का पत्ता लगाने का कार्य करते है।

ग्राही के प्रकार :-

ग्राही कुल पाँच प्रकार के होते है-

  1. प्रकाश ग्राही
  2. श्रवण ग्राही
  3. रस संवेदी ग्राही
  4. घ्राण ग्राही
  5. स्पर्श ग्राही

पाँचों प्रकार के ग्राही हमारी ज्ञानेन्द्रियों में पाए जाते है –

तंत्रिका ऊत्तक :-

यह तंत्रिका कोशिकाओं या न्युरॉन्स का बना एक संगठित जाल होता है। यह सभी सूचनाओं को विद्युत आवेग के रूप में शरीर में एक स्थान से दुसरें स्थान पर ले जाने का कार्य करती है।

तंत्रिका कोशिका के भाग :-

कुल तीन भागों में विभक्त होती है-

  1. द्रुमाकृतिक सिरा – यहाँ सूचना उपार्जित या प्राप्त की जाती है।
  2. द्रुमिका से कोशिकाय तक – इससे होकर सूचनाएं प्रवाहित होती है।
  3. एक्सॉन – यहाँ पर आवेग को रासायनिक संकेत में बदलने का कार्य किया जाता है।

तंत्रिका के द्वारा सूचना संचरण :-

सभी एकत्रित की गई सूचनाएं हमारे मस्तिष्क तक पहुचाई जाती है। जिससे इस कार्य किया जा सकें। इसके लिए सबसे पहले सूचना दु्रमिका के द्वारा ग्रहण की जाती है। जहाँ से यह विद्युत आवेग में बदलते हुए आगे एक्सॉन तक संचरित होते है। एक्सॉन में विद्युत आवेग को रासायनिक संकेत में परिवर्तित किया जाता है। जिससे यह आगे प्रवाहित हो सकें।

ये रासायनिक संकेत रिक्त स्थान या सिनेप्स या सिनेप्टिक दरार को पार करते है। इसके पश्चात् अगली तंत्रिका में भी इसी तरह का विद्युत आवेग प्रांरम्भ करते है। इस प्रक्रिया के द्वारा संकेत एक स्थान से दुसरे स्थान पर भेजे जाते है।

सिनेप्टिक दरार :-

दो तंत्रिका कोशिकाओं के मध्य में पाए जाने वाले रिक्त स्थान को सिनेप्स या सिनेप्टिक दरार कहते है।

प्रतिवृति क्रिया :-

किसी भी बाहृय उद्दीपन के प्रति मस्तिष्क के हस्तक्षेप के बिना सम्पन्न होने वाली अनुक्रिया को ही प्रतिवर्ती क्रिया कहते है। ये क्रियाएं जीव की इच्छा के बिना ही सम्पन्न होती है। यानि स्वतः सम्पन्न होती है। उदाहरण कुछइस प्रकार से है।

  1. गर्म वस्तु को छुते ही हाथ का अपने आप ही हट जाना।
  2. पसंद का खाना देखते ही मुँह में पानी का आ जाना।
  3. काँटा या सूई के चुभ जाने पर हाथ का हट जाना।

प्रतिवर्ती क्रियाओं का नियंत्रण :-

प्रतीवर्ति क्रियाएं मेरूरज्जु के द्वारा नियंत्रित होती हैं। ताकि संकेत पहुंचनें में देरी नहीं हो।

ऐच्छिक क्रियाएं :-

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, ऐच्छिक यानि इच्छा के अनुसार । ऐसी क्रियाएं जो हमारी इच्छा के अनुसार सम्पन्न होती है, या फिर जिन पर आपका नियंत्रण हो । ऐच्छिक क्रियाएं कहलाती है। उदाहरण देखे तो – चलना, बोलना, बैठना, लिखना आदि।

इन क्रियाओं का नियंत्रण हमारे अग्र मस्तिष्क के द्वारा होता है।

अनैच्छिक क्रियाएं :-

जैसा कि नाम से स्पष्ट है, कि अनैच्छिक यानि इच्छा के बिना या आपकी इच्छा के परे। ऐसी शारीरिक क्रियाएं जिन पर आपका नियंत्रण नहीं होता है। स्वतः ही सम्पन्न होती है। अनैच्छिक क्रियाएं कहलाती है। उदाहरण के तौर पर – ग्रहण किए गए भोजन का पाचन, साँस की क्रिया, हृदय का धड़कना आदि।

इन क्रियाओं पर नियंत्रण मध्य मस्तिष्क व पश्च मस्तिष्क के द्वारा किया जाता है।

यहां पर निम्नलिखित बिन्दुओं को सम्मिलित किया गया है –

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