NCERT Solutions for Class 10 Science Chapter 6 Pdf

प्रिय विद्यार्थियों और सम्मानित साथियों ,
आज के इस लेख में हम कक्षा 10 के विज्ञान विषय की अध्ययन सामग्री के बारें में चर्चा करेंगें। जिसमें एन.सी.ई.आर.टी. के पाठ्यक्रम के अनुसार चर्चा करेंगें।
एन.सी.ई.आर.टी. के पाठ्यक्रम का केन्द्रिय बोर्ड के साथ – साथ विभिन्न राज्य बोर्ड भी अनुपालन करते है। जैसे – राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड। इसमें विद्यार्थियों को करके सीखने पर बल दिया जाता है। बच्चों की प्रकृति जिज्ञासु बनायी जाती है, ताकि उनकी रूचि विषय में पैदा हो सके।

हमारी टीम के द्वारा अध्याय का हल हिन्दी तथा अंग्रेंजी दोनो भाषाओं में उपलब्ध करवाया गया है। जिससे आपको अलग – अलग इसके लिए प्रयत्न नहीं करने पड़े। इसी के साथ पाठ्यपुस्तक के अध्याय भी आपको उपलब्ध करवाए जा रहे है, ताकि आपको पुस्तक की आवश्यकता होने पर इधर – उधर प्रयास नहीं करना हो।

इस लेख में हम अध्याय 6 के बारें में चर्चा करेंगें। अध्याय का नाम जैव प्रक्रम रहेगा। (Life Processes) अध्याय 6 में मुख्य रूप से जीवों के बारें में चर्चा करेंगें। कुछ जीव सजीव तथा कुछ निर्जीव होते है। क्या सारे जीव सजीव होते है। सजीव कौनसे जीव होते है। जो जीव गति करते है, वो सजीव होते है। जब एक व्यक्ति सो रहा है। तब वह कहीं निर्जीव तो नहीं होता है, क्यों कि वो इस समय गति नहीं करता है।
क्या आप जानते है जैव प्रक्रम क्या होता है –

जब हम कोई कार्य नहीं करते है, तब भी शरीर में रख-रखाव का कार्य चलता रहता है। यहीं रख-रखाव का कार्य जैव प्रक्रम कहलाता है। इस प्रक्रम में शरीर को ऊर्जा की आवश्यकता होती है। अब यह ऊर्जा की आवश्यकता कैसे पुरी होती है। श्वसन की क्रिया में शरीर की ऊर्जा आवश्यकता पूरी होती है।

पोषण –

शरीर को गति, वृद्धि एवं विकास के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यह आवश्यकता भोजन से पुरी होती है। भोजन से हमें कार्बोहाइड्रेट, विटामीन, प्रोटीन आदि मिलते है। जो शरीर भोजन से मिलते है।

अब यहां पर सवाल आता है कि सजीव भोजन कैसे बनाते है। तो यह प्रक्रिया दो प्रकार से सम्पन्न होती है। एक तो स्वपोषी दुसरे विषमपोषी।

स्वपोषी वे होते है जो कार्बन डाई ऑक्साइड तथा जल से सूर्य के प्रकाश की मौजुदगी में अपना भोजन स्वयं ही बनाते है। उदाहरण की बात करें तो पादप। पादपों में क्लोरोफिल नामक एक वर्णक पाया जाता है। जिसके आधार पर पौधे अपना भोजन स्वयं बनाते है।

विषमपोषी वे होते है जो अपने भोजन के लिए दुसरो पर निर्भर करते है उदाहरण देखे तो बकरी, गाय आदि।

मनुष्य में पोषण :-

मनुष्य अपने भोजन के लिए दुसरो पर निर्भर करता है। मनुष्य में तैयार भोजन को ग्रहण करने से लेकर अपशिष्ट को त्यागने तक विभिन्न अंग पाए जाते है। मुख, ग्रासनली, ग्रासनाल, आमाशय, क्षुद्रांत्र, वृहदांत्र आदि।

श्वसन :-

यह एक ऊष्माक्षेपी प्रक्रम है। जिससे आपको ऊर्जा मिलती है। इसमें ऑक्सीजन गैस ग्रहण की जाती हैं । कार्बन डाई ऑक्साइड गैस निकलती है। इस प्रक्रम में ग्लुकोज का निर्माण होता है। इस अध्याय में आप परिवहन तंत्र भी पढ़ने वाले है।

यहां पर निम्नलिखित बिन्दुओं को सम्मिलित किया गया है :-

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