NCERT Solutions for Class 10 Science Chapter 5 Pdf

प्रिय विद्यार्थियों और सम्मानित साथियों ,
आज के इस लेख में हम कक्षा 10 के विज्ञान विषय की अध्ययन सामग्री के बारें में चर्चा करेंगें। जिसमें एन.सी.ई.आर.टी. के पाठ्यक्रम के अनुसार चर्चा करेंगें।
एन.सी.ई.आर.टी. के पाठ्यक्रम का केन्द्रिय बोर्ड के साथ – साथ विभिन्न राज्य बोर्ड भी अनुपालन करते है। जैसे – राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड। इसमें विद्यार्थियों को करके सीखने पर बल दिया जाता है। बच्चों की प्रकृति जिज्ञासु बनायी जाती है, ताकि उनकी रूचि विषय में पैदा हो सके।

हमारी टीम के द्वारा अध्याय का हल हिन्दी तथा अंग्रेंजी दोनो भाषाओं में उपलब्ध करवाया गया है। जिससे आपको अलग – अलग इसके लिए प्रयत्न नहीं करने पड़े। इसी के साथ पाठ्यपुस्तक के अध्याय भी आपको उपलब्ध करवाए जा रहे है, ताकि आपको पुस्तक की आवश्यकता होने पर इधर – उधर प्रयास नहीं करना हो।

इस लेख में हम अध्याय 5 के बारें में चर्चा करेंगें। अध्याय का नाम तत्वों का आवर्त वर्गीकरण रहेगा। (Periodic Classification of Elements) अध्याय 5 में मुख्य रूप से प्रकृति में पाए जाने वाले तत्वों एवं इनके आवर्त सारणी में स्थान से ही संबंधित है। ध्यान रहे अब तक कुल 118 तत्व ही ज्ञात है। इन तत्वों में से 94 तत्व ऐसे है, जो कि प्राकृतिक रूप से पाए जाते है। यहॉ पर ज्ञात सभी तत्वों को व्यवस्थित करने के लिए इनके वर्गीकरण की आवश्यकता महसुस की गई।

डॉबेराइनर का त्रिक नियम :-

व्यवस्थित करने की कड़ी में सबसे पहले 1817 में जर्मनी के एक वैज्ञानिक ने प्रयास किया। जिनका नाम डॉबेराइनर था। इन्होंने त्रिक नियम दिया। जिसके अनुसार तत्वो के तीन-तीन के समुह बनाए गए। अब इनको आरोही क्रम में जमाया गया। तत्वों को आरोही क्रम में जमाने पर पहले और तीसरे तत्व के द्रव्यमान का आधा यदि किया जाए तो मध्य वाले परमाणु के द्रव्यमान के समान होता है। उदाहरण के तौर पर लिथियम, सोडियम और पौटेशियम का त्रिक।

यह वर्गीकरण सभी तत्वों पर लागु नहीं होता। केवल कुछ समुहों पर ही लागु होता है। इसलिए ज्यादा नहीं चल सका। जब यह नियम नहीं चला तब एक अन्य वैज्ञानिक जिनका नाम न्यूलैंडस था, उन्होंने इस क्षेत्र में प्रयास किए एवं अष्टक नियम दिया |

न्यूलैंडस का अष्टक नियम :-

इनके द्वारा संगीत के सुर की भांति तत्वों का वर्गीकरण किया। इनके द्वारा कुल आठ – आठ तत्वों का समुह बनाया गया। प्रत्येक तत्व के गुण अपने से आगे आठवें स्थान के तत्व के साथ मिलते है। जिसके आधार पर तत्वों का वर्गीकरण किया गया। लेकिन यह नियम भी कारगर नहीं हुआ ।

मैण्डलिफ का आवर्त वर्गीकरण :-

तब मेण्डलिफ के द्वारा तत्वों का वर्गीकरण किया गया। कुल 63 तत्व उस समय तक ज्ञात थें। अतः उनका वर्गीकरण मैण्डलिफ के द्वारा किया गया। इनके वर्गीकरण का आधार परमाणु का द्रव्यमान था। लेकिन सभी तत्वों को स्थान इनके द्वारा नहीं प्रदान किया गया।
कुछ खाली जगह भी उनके द्वारा छोड़ दिए गए। समभारिक तत्वों को एक ही स्थान में रखा गया । गुण भिन्न – भिन्न होने के कारण भी तत्वों को एक ही समुह में रखा गया। जो न्याय संगत नहीं है। इससे मैण्डलिफ की सारणी में गुणों के साथ – साथ कुछ सीमाएं भी आ गई।

हेनरी मोजले का आवर्त वर्गीकरण :-

अन्त में मैण्डलिफ की आवर्त वर्गीकरण की सीमाएं ही दूर करने के लिए हेनरी मोजले ने अपना आवर्त वर्गीकरण पेश किया। जिसमें द्रव्यमान के स्थान पर परमाणु क्रंमाक को वर्गीकरण का आधार बनाया। सन् 1913 के मध्य में इन्होंने वर्गीकरण पेश किया। मुख्य तौर पर लगभग सभी कमियों को दुर कर दिया गया।

यह हाइड्रोजन को स्थान नहीं दे पाए। इनके अनुसार पहले कक्ष में 2, दुसरे में कुल आठ इलेक्ट्रॉन भरे जाते है। आधुनिक आवर्त सारणी के अनुसार आवर्त सारणी में कुल सात आवर्त तथा अठारह वर्ग है। लैन्थेनाइड तथा एक्टीनॉइड सारणी को मुख्य सारणी से अलग रखा गया है।

यहां पर निम्नलिखित बिन्दुओं को सम्मिलित किया गया है :-

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