NCERT Solutions for Class 10 Science Chapter 11 Pdf


प्रिय विद्यार्थियों और सम्मानित साथियों ,
आज के इस लेख में हम कक्षा 10 के विज्ञान विषय की अध्ययन सामग्री के बारें में चर्चा करेंगें। जिसमें एन.सी.ई.आर.टी. के पाठ्यक्रम के अनुसार चर्चा करेंगें।

एन.सी.ई.आर.टी. के पाठ्यक्रम का केन्द्रिय बोर्ड के साथ – साथ विभिन्न राज्य बोर्ड भी अनुपालन करते है। जैसे – राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड। इसमें विद्यार्थियों को करके सीखने पर बल दिया जाता है। बच्चों की प्रकृति जिज्ञासु बनायी जाती है, ताकि उनकी रूचि विषय में पैदा हो सके।

हमारी टीम के द्वारा अध्याय का हल हिन्दी तथा अंग्रेंजी दोनो भाषाओं में उपलब्ध करवाया गया है। जिससे आपको अलग – अलग इसके लिए प्रयत्न नहीं करने पड़े। इसी के साथ पाठ्यपुस्तक के अध्याय भी आपको उपलब्ध करवाए जा रहे है, ताकि आपको पुस्तक की आवश्यकता होने पर इधर – उधर प्रयास नहीं करना हो।

आज के इस अध्याय का नाम मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार रहेगा। इस अध्याय में सर्वप्रथम मानव नेत्र के बारे में चर्चा करेंगे। मानव में नेत्र के कौन – कौन से भाग होते है। इसी के साथ मानव नेत्र दोष कौनसे है । इना किस प्रकार से निदान किया जा सकता है। मानव नेत्र का व्यास लगभग 2.3 से.मी. तक होता है। एक स्वस्थ नेत्र के लिए उसकी समंजन क्षमता 25 से.मी. से अनन्त तक होती है।

एक नेत्र से हम कुल 150 डिग्री तक का क्षेत्र देख पाते है। लेकिन जब दोनो नेत्रों से देखा जाता है, तो नेत्र का दृष्टि क्षेत्र बढ़ जाता है। जिससे मानव कुल 180 डिग्री तक का क्षेत्र देख पाते है। इसलिए दृष्टि क्षेत्र को बढ़ाने के लिए एवं दृष्टि संसूचन की सामर्थ्य बढ़ाने के लिए दो नेत्र पाए जाते है।

मनुष्य में कुल तीन दृष्टिदोष पाए जाते है –

  • निकट दृष्टि दोष
  • दीर्घ दृष्टि दोष
  • जरा दृष्टि दोष

निकट दृष्टि दोष :-

इस दोष के अर्न्तगत मनुष्य निकट की वस्तुएं स्पष्ट देख पाता है। लेकिन दूर स्थित वस्तुओं को स्पष्ट नहीं देख पाता है। अवतल लेंस की मदद से इस दोष का निवारण किया जा सकता है।

दीर्घ दृष्टि दोष :-

इस दोष के अर्न्तगत मनुष्य दूर की वस्तुएं स्पष्ट देख पाता है। लेकिन निकट स्थित वस्तुओं को स्पष्ट नहीं देख पाता है। उतल लेंस की मदद से इस दोष का निवारण किया जा सकता है।

जरा दृष्टि दोष :-

इस दोष के अर्न्तगत मनुष्य ना तो दूर की वस्तुएं स्पष्ट देख पाता है, और ना ही पास स्थित वस्तुएं स्पष्ट देख पाता है। यह दोष बढ़ती हुई आयु के साथ – साथ मानव में आता है। उतल लेंस तथा अवतल लैंस दोनो से बने चश्में की मदद से इस दोष का निवारण किया जा सकता है।

इसके पश्चात् इन्द्रधनुष का बनना, तारों का टिमटिमाना, सूर्योदय से पहले तथा सूर्योदय के पश्चात् तक सूर्य का दिखाई देना आदि रोचक प्रश्नों का हल भी इस अध्याय में देखने का मिलेगा।

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